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क्या वीर्य की मात्रा बढ़ाने वाले प्रोडक्ट असर करते हैं?

26 July 2018, Thursday
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मार्केट में ऐसे सदियों से ऐसे कई प्रोडक्ट बिकते आए हैं जो वीर्य की मात्रा बढ़ाने का वादा करते हैं। आज समय है अपने आप से एक सवाल पूछने का : क्यों? आइए देखते हैं।

वीर्य की मात्रा क्यों बढ़नी चाहिए?

ये पता लगाना मुश्किल है कि पहले प्रोडक्ट आया था या वीर्य बढ़ाने की इच्छा। क्या किसी आदमी को बैठे-बैठे यह ख्याल आया होगा कि क्यों न और ज़्यादा झड़ाऊँ? क्या ऐसा था कि लड़के की पार्टनर ने उसे पहली बार कहा हो “तुम्हारा पिछले वाले जैसा नहीं झड़ता। कुछ दिक्कत है तुम्हें?” या फिर किसी तेज-तर्रार आदमी ने सोचा होगा कि सेक्स को लेकर आदमियों की चिंताएँ दूर करने के प्रोडक्ट का जबर्दस्त मार्केट है? सबसे संभावित कारण यह लगता है कि वीर्य की मात्रा को मर्दानगी से जोड़कर देखा जाता है (जो सच है और नहीं भी है; नीचे देखें) और जिन पुरुषों को ज़्यादा बच्चे चाहिए होते थे, खासकर लड़के, उन्हें ऐसा बताया गया था कि वीर्य ज़्यादा होने पर इसकी संभावना ज़्यादा होती है। आज मार्केट में दर्जनों कंपनियाँ वीर्य बढ़ाने वाली ऐसी दवाइयों के खोखले दावे करती हैं और अपना प्रोडक्ट खरीदने के मुख्यतः तीन कारणों पर ध्यान केन्द्रित करती हैं: ज़्यादा वीर्य से आपकी मर्दानगी बढ़ जाती है, ज़्यादा वीर्य से सेक्स में आनंद बढ़ जाता है, और ज़्यादा वीर्य से गर्भाधान कराने की क्षमता बढ़ जाती है। चलिए इन सभी दावों पर नज़र डालते हैं।

वीर्य मात्रा और मर्दानगी

वीर्य मात्रा में बढ़त का दावा करने वाली अधिकतर वेबसाईटें आपको बताएँगी कि आप जितना ज़्यादा झड़ाएंगे आपकी कामेच्छा उतनी ही बढ़ जाएगी और मर्दानगी का एहसास होगा (एक तरह से ब्लू फिल्म सितारों की ओर इशारा किया जाता है।) एक नजरिए से देखें तो ये बड़ी सटीक मार्केटिंग है क्योंकि इसे सिद्ध करना मुश्किल है। मर्दानगी महसूस करना एक दिमागी अवस्था है; यह सीधे शरीर से जुड़ी नहीं होती। हम जानते हैं कि हर मर्द में वीर्य की मात्रा अलग-अलग होती है। एक आदमी जो आधा चम्मच स्खलित करता है, उसे ज़्यादा मर्दानगी महसूस हो सकती है और हो सकता है जो इससे भी ज़्यादा स्खलित करता है उसे बिल्कुल मर्दानगी महसूस हो। सीधी भाषा में कहें तो हम लोग ही वीर्य की मात्रा की परिभाषा बना रहे हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि दुनिया का कोई वैज्ञानिक इसका परीक्षण करके कुछ सिध्द नहीं कर पाया है; हम असल में नहीं जानते कि अधिकतर पुरुष वीर्य की मात्रा में सोचते क्यों हैं और इससे अपनी मर्दानगी या सेक्स में आनंद को लेकर उनके मन में क्या विचार आते हैं।

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अपने वीर्य की मात्रा बढ़ाएँ, सेक्स में आनंद बढ़ाएँ?

इंटरनेट पर सेल्स वाले कहते हैं कि ज़्यादा वीर्य से चरम सुख ज़्यादा देर तक चलता है और उसमें दम महसूस होता है। ऐसा कुछ नहीं होता और इसकी संभावना नहीं होती। ऐसा कोई शोध नहीं किया गया है जो स्खलित वीर्य की मात्रा और सेक्स के आनंद में संबंध स्थापित कर पाया हो। वीर्य जिन नलिकाओं में से गुजरता है जिनमें ज़्यादा नर्व नहीं होतीं और इसलिए इस बात की संभावना कम है कि स्खलन के समय पुरुषों को वीर्य के बहने का उतना ही एहसास होता हो जितना मसल्स में अपने-आप आ रहे झटकों का होता है जो वीर्य को शरीर से बाहर निकालते हैं।

वीर्य की मात्रा और गर्भाधान करवाने की क्षमता

वीर्य की मात्रा के बारे में अधिकतर लेख वीर्य की सघनता और उसकी मात्रा में फर्क नहीं कर पाते। वीर्य सघनता का अर्थ होता है वीर्य में कितने शुक्राणु हैं – सघनता जितनी ज़्यादा होगी, वीर्य में उतने ज़्यादा शुक्राणु होंगे। वीर्य की मात्रा और सघनता के बीच का संबंध एक ऐसी चीज है जिस पर काफी वैज्ञानिक शोध किए गए हैं। ये शोध अधिकतर गर्भाधान करवाने की क्षमता को लेकर किए गए हैं। अच्छे शुक्राणु वाले उर्वर पुरुषों में वीर्य की अधिक मात्रा का अर्थ ज़्यादा शुक्राणु जरूर होता है (क्योंकि हर चीज अधिक होती है)। लेकिन यदि किसी आदमी का वीर्य पतला हो तो उसकी वीर्य मात्रा बढ़ने के बाद भी शुक्राणुओं की संख्या कम ही रहेगी और उसकी गर्भाधान करवाने की क्षमता कम होगी। वीर्य की मात्रा और गर्भाधान करवाने की क्षमता का संबंध हमेशा एक जैसा नहीं होता, और यदि मर्द को बच्चा पैदा करने में समस्या आ रही हो तो उसे डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। इसके लिए इंटरनेट से खरीदी हुईं अप्रामाणिक दवाइयाँ नहीं लेनी चाहिए।

क्या वीर्य की मात्रा बढ़ाना संभव है?

ये एक दस हजार रुपए का तीन महीने के कोर्स का प्रश्न है: क्या ये वीर्य बढ़ाने का दावा करने वाली दवाएं असर करती हैं? ऐसा कोई वैज्ञानिक, आकलन किया गया शोध नहीं है जो यह दर्शाता है कि इनसे वीर्य बढ़ जाता है। कई कंपनियाँ शोध का संदर्भ देती हैं लेकिन गहराई में जाने पर पता चालता है कि शोध इनके प्रोडक्ट पर नहीं किया गया था और अधिकतर शोध का उद्देश्य ही कुछ और था। वास्तविक शोध को गलत तरीके से पेश करके ये कंपनियाँ अपने प्रोडक्ट की विश्वशनीयता बढ़ाने की कोशिश करती हैं। यह हो सकता है कि इन दवाओं को लेने से मनोवैज्ञानिक रूप से आदमी सोचने लगता है कि उसे फायदा हुआ है और पहले से ज़्यादा स्खलित हो रहा है। वह यह भी सोचता है कि ऐसा इन दवाओं के कारण ही हो रहा है। वीर्य की मात्रा मापना उतना आसान नहीं होता जितना आप सोचते हैं और अपक्षपाती शोध के अभाव में आपको कंपनियों की बात पर भरोसा करना होगा, जो उचित नहीं होता। वीर्य की मात्रा पर प्रभाव डालने वाले कारकों पर कुछ शोध जरूर किए गए हैं। अधिकतर शोधों ने पाया है कि बीमारियाँ, बीमारियों के इलाज, और रसायनों के दुष्प्रभावों से उर्वरता पर गहरा प्रभाव पड़ता है लेकिन ये वीर्य की मात्रा पर उतना असर नहीं डालते। यह संभावित रूप से सच हो सकता है कि शरीर में पानी की उचित मात्रा बने रहने से वीर्य की मात्रा बढ़ जाती है (लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आपकी मात्रा “सामान्य” से ज़्यादा होगी)। कम से कम एक शोध ने यह पाया था कि स्खलन के बीच 2 से 3 दिन का अंतर होने से वीर्य की मात्रा में कोई बढ़त नहीं होती।

तो मैं ब्लू फिल्म वालों जैसे कैसे कर सकता हूँ?

तो आखिर ये ब्लू फिल्म वाले चम्मच की जगह कटोरे भर कर कैसे निकालते हैं? इस प्रश्न के कई उत्तर हैं। सबसे पहली चीज है कैमरे के अलग-अलग एंगल, दूसरा ये लोग वीर्य को इस तरह निकालते हैं जिससे वह बहुत फैलता है और उसकी मात्रा ज़्यादा प्रतीत होती है। यह भी याद रखें कि वीर्य की मात्रा हर पुरुष में अलग-अलग होती है और कुछ आदमियों में दूसरों की तुलना में चार से पाँच गुना अधिक हो सकती है। कई बार ये पुरुष ब्लू फिल्मों में चले जाते हैं। लेकिन ब्लू फिल्में असली सेक्स का पैमाना नहीं होतीं और यही बात वीर्य की मात्रा के लिए भी सच है।
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