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ग्रीन कॉफी बीन: क्या इस वजन घटाने के सप्लीमेंट के लाभ, जोखिमों से अधिक हैं? (Updated)

23 July 2018, Monday
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ग्रीन कॉफी बीन: क्या इस वजन घटाने के सप्लीमेंट के लाभ, जोखिमों से अधिक हैं? आप कॉफी को अपनी “लत” के तौर पर देख सकते हैं, लेकिन आप विश्वास करें या नहीं, अध्ययन दर्शाते हैं कि अनेक अवसरों पर कॉफी उपभोक्ताओं में अनेक गंभीर रोगों के जोखिमों को इसका उपभोग ना करने वालों की तुलना में कम देखा गया है — फिर चाहे हम पारंपरिक कॉफी की बात करें,मशरूम कॉफी की या फिर ग्रीन कॉफी बीन की। कैफीन की कॉफी पोषण में उपस्थिति ने इसकी साख पर बट्टा लगाया है, लेकिन शोध दर्शाते हैं कि कैफीन की नकारात्मक साख अर्धसत्य हो सकती है। खपत की मात्रा के आधार पर, कैफीन के सकारात्मक व नकारात्मक दोनो प्रभाव हो सकते हैं। कैफीन की उपस्थिति वाले “उत्तजेक” उत्पादों में मैग्नीशियम, मैंगनीज़ और पोटेशियम जैसे कुछ खनिज और ऐंटीऑक्सिडेंट तत्व हो सकते हैं। अधिकांश वाणिज्यिक कॉफियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली गहरी रोस्टिंग प्रक्रिया, ऐंटीऑक्सिडेंट तत्वों को काफी कम कर देती है। यदि आप एक या दो कप कॉफी हर रोज पिएं तो संभवतः यह ठीक है। लेकिन जब आप इससे अधिक मात्रा पीने लगते हैं तो दुर्भाग्य से आपकी इस आदत के कारण आपको एसिडिटी होगी और आपके एडर्नल ग्लैंड में तनाव होगा। दूसरी ओर, जबकि कैफीन सभी को सहन नहीं होती है और इसलिए कभी-कभार इससे बचना चाहिए, इस बात के साक्ष्य बढ़ रहे हैं कि ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट कहे जाने वाले उत्पाद सहित, कॉफी और कैफीन के दूसरे स्रोतों के औसतसे उपभोग करने से वजन घटाने और रोगों की रोकथाम में सहायता मिल सकती है। हाल के बरसों में ग्रीन कॉफी बीन, बाज़ार में उपलब्ध बेहद लोकप्रिय सप्लीमेंट और वजन घटाने के उत्पादों में से एक के रूप में उभर रही है। भूख को कम करके कुछ अतिरिक्त वजन को कम करने में लोगों की सहायता करने के अलावा, दूसरे तरीकों के साथ, ग्रीन कॉफी दिल के रोग, न्यूरोलॉजिकल रोगों से सुरक्षा, और उम्र के बढ़ने से संबंधित विभिन्न दूसरे ऐंटी-एजिंग प्रभावों से संबंधित रही है। कुल मिलाकर अभी भी इस बात पर चर्चा जारी है कि ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट कितना प्रभावी है, जिसमें इस बात पर चिंताएं भी शामिल हैं कि कुछ अध्ययनों में शामिल शोधकर्ता इतने अधिक पक्षपाती रहे हैं कि उन पर भरोसा नहीं भी किया जा सकता है। (1) हालांकि, इस समय इस बात के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है कि ग्रीन कॉफी का उन स्वास्थ्य संबंधी सबसे बड़ी चुनौतियों पर हल्का या मध्यम दर्जे का प्रभाव हो सकता है, जिनका सामना हम आज कर रहे हैं, जो कि उन लाभों के समान हैं जो कॉफी पीने से होते हैं।

ग्रीन कॉफी बीन क्या हैं?

ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट वास्तव में क्या है, और दूसरे कॉफी उत्पादों के उपभोग से इसमें क्या अंतर है? ग्रीन कॉफी बीन्स, और “ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट” के लेबल वाले उत्पाद ऐसी कॉफी बीन से मिलते हैं जिनको भूना या उच्च स्तर पर प्रोसेस नहीं गया है। आम तौर पर हमारे द्वारा पी जाने वाली काली/ब्रू की गयी कॉफी को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली बीन्स को 475 डिग्री पर रोस्ट किया जाता है, जो बीन की रासायनिक संरचना, रंग, अरोमा, स्वाद और पोषकों की सांद्रता को बदल देती है। पेय में ब्रू किए जाने की बजाय, शुद्ध ग्रीन कॉफी बीन/बीज एक्सट्रैक्ट को आम तौर पर गोली (पिल) के रूप में लिया जाता है, जिसे कुछ पोषकों की उच्च सांद्रता वाली कुचली गयी ग्रीन कॉफी बीन्स से बनाया जाता है।

ग्रीन कॉफी अनेक प्रकार के ऐंटीऑक्सीडेंट्स और अन्य लाभाकारी यौगिकों की समृद्ध स्त्रोत होती है जिनमें पॉलीफेनॉल्स भी शामिल हैं। एक प्रकार के पॉलीफेनॉल को क्लोरोजेनिक कहा जाता है जो कि ग्रीन कॉफी बीन्स में काफी मात्रा में होता है।क्लोरोजेनिक एसिड को कॉफी बीन्स के उपभोग के बारे में सबसे लाभकारी चीज़ माना जाता है और यही वह कारण है कि ग्रीन कॉफी सप्लीमेंट को प्राकृतिक रूप से वजन कम करने वाली और चर्बी जलाने वाली कहा जाता है। दुर्भाग्य से कॉफी बीन्स को भूनने से कॉफी में मिलने वाला क्लोरोजेनिक एसिड का हिस्सा समाप्त हो जाता है, जिसके कारण शुद्ध/बिना भूनी हुई बीन्स के उपभोग को अनेक तरीकों से बेहतर माना जाता है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक अध्ययन में पता लगा कि ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट में कैफेइक, फेरुलिक, आइसोफेरुलिक और पी-कॉमेरिक एसिड सहित तीन प्रकार के क्लोरोजेनिक और कैफॉल्किनिक एसिड (CGA), डिकैफॉल्किनिक एसिड और ऐंटीऑक्सिडेंट होते हैं। 10 स्वस्थ वयस्कों को 170 मिग्रा कॉफी एक्सट्रैक्ट देने के बाद शोधकर्ताओं को पता लगा कि इन लाभकारी यौगिकों के स्तर उपचार के आधे घंटे से आठ घंटों तक उच्चतम रहा। उन शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला, “यह अध्ययन दर्शाता है कि ग्रीन कॉफी में उपस्थित प्रमुख CGA यौगिक मानवों में उच्च स्तर पर अवशोषित व मेटाबोलाइज़्ड होते हैं।” (2 )

किसी शोध से पता लगा है कि ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट में दूसरे हाइड्रॉक्सीसिनामिक एसिड के साथ लगभग 46 प्रतिशत क्लोरोजेनिक एसिड होते हैं, जो ऐंटीऑक्सिडेंट स्वास्थ्य लाभों के लिए जाने जाते हैं। कुल मिला कर क्लोरोजेनिक एसिड तथा दूसरे हाइड्रॉक्सीसिनैमिक एसिड की कुल सांद्रता लगभग 57 प्रतिशत तक होती है। अधिकांश मानीकृत ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट उत्पादों में 2 से 4 प्रतिशत तक कैफीन की मात्रा दर्शायी जाती है।

किस उम्र में Green Coffee सबसे अधिक असरदार है?


माना जाता है कि Green Coffee के बीजों को केवल 30-40 की उम्र में पीना चाहिए। आखिर, युवावस्था में तो मेटाबोलिज़्म वैसे भी अच्छा होता है। और 40 की उम्र के बाद, वजन कैसे घटाया जाए इसके बार में सोचने के बजाय, महिलाओं और पुरुषों की प्राथमिकताएँ दूसरी होती हैं।

लेकिन ऐसा नहीं है। Green Coffee सभी के लिए उपयुक्त है।


18-35 की उम्र। युवावस्था में, शरीर दुबला और कसा हुआ होता है। लेकिन अपवाद भी हैं। अतिरिक्त वजन की समस्या से सभी परिचित हैं और लगभग स्कूल के समय से ही। उम्र के साथ, यह समस्या केवल बढ़ती है। महिलाएं प्रसव के बाद मोटी हो जाती हैं, और पुरुष – बैठकर काम करने के कारण। कभी-कभी अधिक वजन की बीमारी भी कारण होती है। लेकिन अगर डॉक्टर ने कहा है कि आप स्वस्थ हैं और उसने आपको कोई दवा नहीं दी है, तो वज़न कम करने और एक सुंदर, दुबली आकृति पाने के लिए Green Coffee सबसे प्रभावी उपाय है।
35-45 की उम्र। इस उम्र में उन लोगों का वज़न भी बढ़ सकता है, जो बचपन से मोटापे का शिकार नहीं थे। मेटाबोलिज़्म काफी धीमा हो जाता है, पर जीवन शैली और भोजन की आदतें वही पुरानी रह जाती हैं। रात के भोजन के बाद मीठा खाने की चाहत, शाम को टेलीविज़न या कम्प्यूटर के सामने बैठे रहना, खेलकूद के लिए समय का अभाव... और, फिर प्यारी पैंट कमर पर फिट नहीं आती, और पुराना साइज़ अब अचानक दो साइज़ बढ़ जाता है। इस स्थिति में संतुलित आहार से मदद नहीं मिलती। थोड़ा भी व्यवधान होने पर इंसान का वज़न जितना कम किया उससे और अधिक बढ़ जाता है। इसीलिए, इस उम्र में Green Coffee महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए उपयुक्त है। यह भोजन की आदतों और जीवन शैली में कोई बदलाव किए बिना आपकी मदद करती है।
45 और उससे अधिक उम्र। रजोनवृति के दौरान और बाद में भी, वज़न बढ़ने का जोखिम उनके लिए भी बढ़ जाता है, जिन्होंने अभी तक अपना शरीर छरहरा बनाए रखा था। और हार्मोन में बदलाव के कारण मेटाबोलिज़्म और धीमा हो जाता है। पहले आप अगर रात को खाई गई ब्रेड से भी मोटे नहीं होते थे, तो 45 की उम्र के बाद हानिरहित उत्पादों, जैसे चावल या हरी सलाद से भी कूल्हों पर चरबी जमा होने लगती है। और तब फिर, मदद के लिए आती है Green Coffee। इससे आपका मेटाबोलिज़्म तेज़ हो जाएगा, और आपको भूखे रहने और लंबे समय तक कसरत करके खुद को तकलीफ़ देने की ज़रूरत नहीं होगी। जब तक Green Coffee आपके शरीर पर काम कर रही है, आप कोई उपयोगी और महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं!

ग्रीन कॉफी बीन में कैफीन की मात्रा

ग्रीन कॉफी बीन एकस्ट्रैक्ट में कैफीन की मात्रा कितनी होती है? मानक ब्रू की गयी कॉफी के एक कप (आठ आउंस) में लगभग 95 मिलीग्राम कैफीन होता है।कॉफी का नियमित कप पीने की तुलना में ग्रीन कॉफी बीन में समान मात्रा में कैफीन होती है, लेकिन ये अंततः आपके द्वारा ली गयी खुराक पर निर्भर करता है— कितने कैप्सूल एक बार में लिए गए और हर रोज़ कितनी बार लिए गए। ग्रीन कॉफी बीन में कैफीन की मात्रा, एक से दूसरे ब्रांड में भिन्न-भिन्न होती है, जिसमें लगभग 25-50 मिलीग्राम कैफीन प्रति कैप्सूल होती है।खुराक की अनुसंसा भी भिन्न-भिन्न होती है, जिसमें प्रतिदिन एक बार अधिकतम 3 कैप्सूल के साथ दिन में तीन बार की खुराक हो सकती है। (<3 ) इसका अर्थ है कि यदि आपको अधिकांश ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट उत्पादों के लिए खुराक निर्देशों का पालन करना हो तो आप लगभग 100-450 मिलीग्राम कैफीन प्रतिदिन लेंगे। इसका अर्थ है नियमित कॉफी के लगभग एक से पांच कप। कॉफी को सजगता और ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना जाता है जिसका कारण इसमें उपस्थित कैफीन है, इसलिए इसमें कुछ हार्मोन्स व न्यूरोट्रांमिटर्स को मुक्त करने के प्रभाव होते हैं। तो क्या ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट को “उत्तेजक” माना जाए? अधिकांश रूप में, हाँ। कैफीन तकनीकि रूप से एक ड्रग है और जब केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के फंक्शन को प्रभावित करने की बात आती है तो कुछ उत्तेजक दवाओं की ही तरह यह भी काम करती है।अधिकांश लोग कैफीन को मेथिल्ज़ाथाइन क्लास का उत्तेजक मानते हैं। मेथिल्ज़ाथाइन उत्तेजक, जबकि इनको लाखों लोगों द्वारा हर रोज उपयोग किया जाता है, फिर भी इनका दिमाग व शरीर के उन कुछ हिस्सों पर सीधा व महत्वपूर्ण प्रभाव होता है जो उत्तेजना, सतर्कता, थकान, चिंता और नींद को नियंत्रित करते हैं। (4 )

ग्रीन कॉफी बीन के 6 लाभ

1. वजन या चर्बी की कमी में सहायता कर सकती है

ग्रीन कॉफी बीजों को सबसे पहले तब लोकप्रियता हासिल हुई जब यह पाया गया कि इसमें वजन कम करने में सहायता करने की क्षमता होती है। जबकि यह निश्चित रूप से सही आकार हासिल करने का तेज और तत्काल उपाय नहीं है, शोध सुझाव देते हैं कि उपभोग किए जाने के बाद क्लोरोजेनिक एसिड बहुत अधिक अवशोषक होता है और शरीर को ग्लूकोस जलाने व शरीर में भंडार हो गयी चर्बी को जला कर ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होते हैं। ये सूजन को भी कम कर सकते हैं (जो कि डायबिटीज़ व अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण है), रक्त के प्रवाह में शुगर के रिलीज़ को धीमा कर सकते हैं और इंसुलीन के रिलीज़ को रेग्यूलेट करने में सहायता सकते हैं, जो कोशिकाओं में ग्लूकोस लाता है। एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन में प्रकाशित एक जानवरों के अध्ययन, जिसमें मोटे चूहे पर ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट (GCBE) के प्रभाव को परखा गया था, उसमें महत्वपूर्ण रूप से शरीर के भारी होने, लीवर वजन और सफेद एडिपोज़ ऊतक भार में कमी देखी गयी, जिसके साथ एडिपोनेक्टिन व लेप्टिम जैसे एडिपोज़ ऊतक लिपोलिसिस में विनियमन देखा गया। इस अध्ययन के अंत में, GCBE से उपचारित उस चूहे में चर्बी का मास (mass) उन चूहों की तुलना में कम पाया गया जिनको GCBD नहीं दिया गया था लेकिन उनको समान चर्बी आहार पर रखा गया था। कुल मिलाकर, वह चूहा जिसे ग्रीन कॉफी बीन दी गयी थी उसमें तुतनात्मक शरीर भार व चर्बी मास(mass) कम हो गया था जिसके कारण शोध करने वालों ने कहा कि “GCBE में संभावित ऐंटी-ओबेसिटी प्रभाव ” होते हैं। (5 )

2. ब्लड शुगर को सामान्य करने में मदद कर सकती है

वैज्ञानिक कहते हैं कि ग्रीन कॉफी बीन के ब्लड शुगर पर सकारात्मक प्रभाव का इसके इन्फेलेमेशन को कम करने के गुण से संबंध है, जो कि स्वस्थ शरीर को हासिल करने में और संभावित रूप से इन्फ्लेमेशन करने वाले आहारों के लिए भूख कम में मदद करता है। साथ ही यह ग्लूकोज़ स्तरों को कम करने में और ऊर्जा को बढ़ाने में मददगार हे सकती है। जबकि कैफीन का मेटाबॉलिक फंक्शन पर सकारात्मक प्रभाव हो सकता है, तो कैफीन मुक्त कर दिए गए ग्रीन कॉफी बीन उत्पादों का भी समान होता दिखता है।(6 ) ग्रीन कॉफी कभी-कभार महत्वपूर्ण रूप से ब्लड शुगर स्तरों को सामान्य करती है, जो टाइप 2 डायबिटीज़ के जोखिम को कम कर सकता है। एवीडेंस बेस्ड कॉम्प्लीमेंटरी ऐंड ऑल्टरनेटिव मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में यह साक्ष्य मिला कि “विसेरल एडीपोज़ ऊतक में ऐडिपोजेनेसिस और इन्फ्लेमेशन में शामिल जीन्स को डाउनरेग्यूलेट करके कैफीन रहित की गयी ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट [उच्च-चर्बी आहार]-प्रेरित चर्बी संग्रह को और इंसुलिन प्रतिरोध रिवर्स करता है।” (7 )

3. ब्लड प्रेशर स्तर को कम करने में मददगार हो सकता है

अनेक अध्ययन बताते हैं कि ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट ब्लड प्रेशर को कम करने में प्रभावी हो सकता है। 17 हाइपो ग्लाइसेमिक रोगियों के एक अध्ययन ने यह दर्शाया कि ग्रीन कॉफी बीज एक्सट्रैक्ट को लेने के बाद 17 विद्यार्थियों में से 13 के बल्ड प्रेशर स्तरों में कमीं आयी। इन प्रतिभागियों ने हर रोज लगभग 800 मिग्रा एक्सट्रैक्ट लिया, जो कि खुराक की उच्च मात्रा मानी गयी है लेकिन इसे ब्लड प्रेशर में कमी लाने में बहुत प्रभावी पाया गया।अन्य शोध दर्साते हैं कि 50-140 मिलीग्राम तक की निम्न खुराक भी वयस्कों में ब्लड प्रेशर कम करने में लाभकारी हो सकत है, यदि उसे 12 हफ्तों तक लिया जाए। 8 ) इस बात के भी साक्ष्य हैं कि क्लोरोजेनिक एसिड में हाइपो-ग्लाइसेमिक एजेंट होते हैं और लिपिड मेटाबॉलिज़्म को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप खून में कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड की मात्रा में कमी आती है। जर्नल ऑफ बायोकेमिस्ट्री में प्रकाशित एक अध्ययन में फास्टिंग प्लाज़्मा ग्लूकोस, प्लाज़्मा और लीवर ट्राईएसिलग्लिसरॉल्स और कोलेस्ट्रॉल मात्राओं पर क्लोरोजेनिक एसिड के प्रभावों की जांच के लिए चूहों को तीन हफ्तों तक ग्रीन कॉफी एक्सट्रैक्ट दिया गया था। यह पाया गया कि इस एक्सट्रैक्ट ने अनेक मार्करों को बेहतर कर दिया। इस प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “फास्टिंग प्लाज़्मा कोलेस्ट्रॉल और ट्राईएसिलग्लिसरॉल्स की मात्राओं में क्रमशः 44% और 58% तक की महत्वपूर्ण कमीं आयी, ठीक ऐसा ही लीवर ट्राईएसिलग्लिसरॉल्स मात्रा (24%) के साथ हुआ।” (9 )



4. क्या ऐंटीएजिंग प्रभाव उपस्थित ऐंटीऑक्सिडेंट के कारण है

वे अध्ययन जहां पर ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट का आंकलन किया गया, अनेक ऐंटीऑक्सिडेंट गुणों को पहचाना गया जो एजिंग के विभिन्न प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकते थे। जैसा कि ऊपर बताया गया, क्लोरोजेनिक एसिड को ग्रीन कॉफी बीन के इन ऐंटीऑक्सिडेंट गुणों के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी कहा जाता है।जबकि मानवों में ऐंटीऑक्सिडेंट के लिए कोई मानक अनुशंसित इनटेक/मात्रा नहीं है, कुछ विशेषज्ञ विश्वास करते हैं कि जब कोई व्यक्ति 400 मिग्रा ग्रीन कॉफी सप्लीमेंट हर रोज लेता(ती) है (आम तौर पर दो या तीन खुराकों में तोड़ कर), तो उसे ऐंटीऑक्सिडेंट की उतनी दैनिक खुराक मिल जाएगी जितनी उस व्यक्ति को आहार से मिलने का लक्ष्य रखना चाहिए।

5. ऊर्जा स्तरों को बेहतर करने में सहायता कर सकता है

कॉफी लोगों को कम थकान का एहसास देती है और ऊर्जा का स्तर बढ़ाती है क्योंकि इसमें उत्तेजक कैफीन होती है। कैफीन दरअसल एक ड्रग मानी जाती है और पूरी दुनिया में सबसे अधिक खपत वाली साइकोऐक्टिव सब्सटेंस है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोससिएशन के अनुसार, कैफीन के “साइकोमोटर और संज्ञानात्मक प्रदर्शन, मनोवैज्ञानिक कल्याण, ब्लडप्रेशर, और नैदानिक व थेराप्यूटिक अनुप्रयोगों के साथ-साथ ऐथेलेटिक प्रदर्शन” पर महत्वपूर्ण प्रभाव होते हैं। (10 ) जब आप कैपीन वाले किसी पेय को लेते हैं या इसे ग्रीन कॉफी बीन जैसे किसी उत्तेजक सप्लीमेंट/उत्पाद से हासिल करते हैं तो, कैफीन को रक्तप्रवाह में अवशोषित कर लिया जाता है, जहां से यह मस्तिष्क में जाती है और एडेनोसिन कहे जाने वाले इन्हेबेटरी न्यूरोट्रांसमिटर्स को ब्लॉक कर देती है। (11 ) उसी समय, नोरेपिनेफ्राइन और डोपामाइन कहे जाने वाले न्यूरोट्रांसमिटर्स के स्तर बढ़ जाते हैं, जिससे बढ़ा हुआ फोकस, मोटिवेशन और सकारात्मक आउटलुक सहित संज्ञानात्मक परिवर्तन होते हैं।

6. आपको फोकस करने में व आपके मूड को बेहतर करने में सहायक हो सकती है

जैसा कि ऊपर बताया गया है, ग्रीन कॉफी उत्पादों में कैफीन की ठीक-ठाक मात्रा होती है, और अधिक खुराक लेने पर इसके उच्चतर स्तर हासिल होते हैं। शोध की एक बड़ी इकाई दर्शाती है कि कैफीन/कॉफी की खपत से मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क के क्रियाकलाप के कई पहलुओं में परिवर्तन आ सकता है जिसमें ध्यान, मूड, स्मृति, चैतन्यता/सजगता, प्रेरण, टेस्ट लेना, प्रतिक्रिया समय, मोटर नियंत्रण/शारीरिक प्रदर्शन तथा अन्य शामिल हैं।(12, 13 ). हालांकि, कैफीन के संज्ञानात्मक फंक्शन पर प्रभाव के मामले में हर व्यक्ति सकारात्मक प्रभाव नहीं दर्शाता है, इसलिए हमेशा अपने लक्षणों की निगरानी करें और शुरुआत में अपनी खुराक को छोटा रखें। आप कैफीन की ओवरडोज़ से बच सकते हैं, जिससे कि आप इसे ग्रीन कॉफी सप्लीमेंट के साथ ओवरडू ना करें।

ग्रीन कॉफी बीन्स को कैसे उपयोग करें

ग्रीन कॉफी बीज एक्सट्रैक्ट उत्पाद में निम्नलिखित की जांच करें।
  • पक्का करें किआप जिस ब्रांड को चुनें उसमें शुद्ध कॉपी बीज एक्सट्रैक्ट हो और उसमें एडेडटिव्स, बाइंडर्स, फिलर्स या सेल्यूलोज़ ना शामिल हों। ऑर्गैनिक उत्पाद आदर्श हैं, क्योंकि वे यह सुनिश्चित करते हैं कि बीन्स को कुछ रासायनों के उपयोग के बिना उगाया गया हो।
  • आपको अमेज़न या अपने स्थानीय हेल्थ फूड स्टोर पर शुद्ध एक्सट्रैक्ट मिल सकता है।
  • यदि आपको कैफीन संवेदनशीलता या दिल की समस्या हो तो (इसके बारे में अधिक) तो अपने डॉक्टर से पहले सलाह करें।
आपको कितनी ग्रीन कॉफी बीन लेनी चाहिए? यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे की आपकी वर्तमान स्थिति, कैफीन सहनशक्ति व शरीर का भार। अनेक ब्रांड शुरुआत में लगभग 800 मिलिग्राम की मात्रा को दिन में दो बार (खाने से 30 मिनट पहले) लेने की अनुशंसा करते हैं। इसी के साथ ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट के लिए कोई मानक “इष्टतम खुराक” नहीं है।अध्ययनों से पता चला है कि लोगों को लाभों का अनुभव तब होता है जब वे 200-400 मिलीग्राम की छोटी खुराक लेते हैं लेकिन उनको अधिक मजबूत प्रभाव तब दिख सकते हैं जब वे खुराक को 800-3000 मिलीग्राम तक ले जाते हैं। अंततः खुराक, आपके सप्लीमेट में क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा पर निर्भर करती है; क्लोरोनिक एसिड की मात्रा जितनी अधिक होगी, आपकी इसकी उतनी कम मात्रा की जरूरत होगी। अनुशंसित इनटेक की रेंज:
  • जब क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा कम हो (लगभग 10 प्रतिशत), 800-3000 मिलीग्राम हर रोज लें।
  • जब क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा अधिक हो (लगभग 20 प्रतिशत), 600-1,500 मिलीग्राम हर रोज लें।
  • जब क्लोरोजेनिक एसिडकी मात्रा लगभग 50 प्रतिशत तक हो तो 200-600 मिलीग्राम हर रोज लें।
खुराक की अनुशंसाओं के लिए निर्देशों को देखें, अपने डॉक्टर की राय लिए बिना 2,000-3,000 मिलीग्राम से अधिक की मात्रा पर जाने के लिए सावधान रहें।

ग्रीन कॉफी बीन के संभावित पश्च प्रभाव

हालांकि इसमें दस्तावेजित लाभ हो सकते हैं, ग्रीन कॉफी बीन कोई चमत्कारी उत्पाद नहीं है। यह एक टूल मात्र है जो आपके वजन घटानें या स्वास्थ्य के दूसरे पहलुओं को बेहतर करने के प्रयासों में मददगार हो सकता है। यह बात दिमाग में रखें कि जबकि सप्लीमेंट सहा.क हो सकते हैं, आप अपने आहार को बदल कर, तनाव कम करके, पर्याप्त नींद लेकर और नियमित व्यायाम (विशेष रूप से HIIT या बर्स्ट ट्रेनिंग) से भी सरल रूप से महत्वपूर्ण परिणाम हासिल कर सकते हैं। कुछ लोगों के लिए भुनी कॉफी सहित कैफीन के अधिक मात्रा की खपत से अनेक साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जिनमें बेचैनी और ब्लड प्रेशर समस्याएं शामिल हैं।कैफीन संवेदनशीलता के इतिहास व दिल की समस्याओं वाले लोगों के लिए, कैफीन युक्त पेयों या सप्लीमेंट से बचना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे हृदय की गति में असामान्यता पैदा हो सकती है या बढ़ सकती है। यदि आपको कैपीन लेने या ग्रीन कॉफी बीन उत्पादों को लेने पर IBS, कब्ज़, डायरिया, सिरदर्द, अनिद्रा या एसिड रिफलेक्स के और खराब होने जैसे लक्षण दिखें तो उनका उपयोग रोकना और सलाह के लिए अपने डॉक्टर से मिलना बेहतर होगा। निम्नलिखित स्थितियों वाले लोगों को कैपीन वाले उत्पादों को लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए जिससे कि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके:
  • गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान
  • घबराहट संबंधी विकार
  • रक्तस्राव संबंधी विकार
  • डायबिटीज
  • डायरिया
  • ग्लूकोमा
  • उच्च रक्तचाप

ग्रीन कॉफी बीन पर अंतिम विचार

  • ग्रीन कॉफी बीन एक्सट्रैक्ट एक सप्लीमेंट है जिसे बिना भुनी हुई “शुद्ध” कॉफी बीन्स से बनाया जाता है जिसमें क्लोरोजेनिक एसिड कहे जाने वाले प्रोटेक्टिव पॉलीफिनॉल, उच्च स्तर पर उपस्थित होते है।
  • ग्रीन कॉफी बीन को लेने से जुड़े कुछ लाभों में वजन या चर्बी मे कमीं शामिल है, ये ब्लड शुगर स्तर व इंसुलिन को कम करने में सहायक है, दिल के स्वास्थ्य, बढ़ी ऊर्जा, संज्ञानात्मक स्वास्थ्य, और बेहतर मूड भी इसके लाभ हैं।
  • वे लोग जो आसानी से कैफीन से प्रभावित हो जाते हैं या उनकी कुछ ऐसी स्थितियां हैं तो उनको बहुत अधिक ग्रीन कॉफी बीन की खपत से पहले अपने डॉक्टरों से सलाह करनी चाहिए, क्योंकि कैफीन के विपरीत प्रभाव भी हो सकते हैं।


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